एक पुरुष का कमरा दिमाग में लाइए।

ठीक?
अब एक स्त्री का कमरा सोचिए।
दोनों में कुछ अंतर मिला?
जेएनयू में चुनाव के दौरान मेल हॉस्टल में कैंपेनिंग के समय शायद मुश्किल से 3-4 ऐसे पुरुष कमरे मिले जो व्यवस्थित, देखने में सुंदर कहे जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर लड़कियों के कमरे में ऐसे 2-4 ही थे जो व्यवस्थित नहीं कहे जा सकते।
हम ऐसे ही बनाई जाती हैं और पुरुष भी। यदि हम बचपन से हम लड़कों को बेसिक चीजें सिखा दें साफ-सफ़ाई ,व्यवस्था, कपड़े तह लगाना, बर्तन साफ, सिंक को साफ रखना, तैलिया बिस्तर पर न छोड़ना, या अपनी चीजों को यथास्थान रखना, तो शादीशुदा महिलाओं की कुछ समस्या तो ऐसे ही हल हो जाएगी।

Comments

Popular posts from this blog

होली