Posts

Showing posts from March, 2026

चिरैया

  चिरैया चिरैया सीरीज आजकल काफी चर्चा में है। अपने छोटे छोटे वाक्यों और सहज भाव मुद्राओं द्वारा यह बेव सीरीज भारतीय समाज की बख़िया उधेड़ने का काम कर रही है। यह कहानी है एक पूजा की और कमलेश की। पूजा आधुनिक विचारों वाली लड़की है। जिसे अखबार को पहले पन्ने से पढ़ने की आदत है। वहीं दूसरी ओर कमलेश भारतीय समाज की उस स्त्री का प्रतिनिधित्व करती नजर आती है जिसे शादी के बंधन में बांध कर उसकी पढ़ाई रोक दी जाती है। जिसकी नजर में लुगाई का अखबार खाने - पीने वाला पेज है। उसे पहले पेज देश,दुनिया, राजनीति से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए। उसके सोचने समझने के सारे दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। आदर्श बहु का रोल उसको इस तरह सीखा दिया जाता है कि कोई भी नई चीज उसे नागवार गुजरती है। कहानी शुरू होती है पूजा और अरुण की देखने दिखाने की रस्म से। जहां ऐसी परिस्थिति में लड़कियों से आज भी उम्मीद की जाती है कि वह कोई भजन या अच्छा पुराना गीत गाएंगी पूजा एक इंग्लिश गाना गाती है। उसके ब्लाउज थोड़े डीप हैं, नए फैशन के हैं। कमलेश ने अरुण को अपने बेटे के जैसे पाला है, उसको लगता है कि वह कुछ गलत कर ही नहीं सकता। शादी से प...
  एक पुरुष का कमरा दिमाग में लाइए। ठीक? अब एक स्त्री का कमरा सोचिए। दोनों में कुछ अंतर मिला? जेएनयू में चुनाव के दौरान मेल हॉस्टल में कैंपेनिंग के समय शायद मुश्किल से 3-4 ऐसे पुरुष कमरे मिले जो व्यवस्थित, देखने में सुंदर कहे जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर लड़कियों के कमरे में ऐसे 2-4 ही थे जो व्यवस्थित नहीं कहे जा सकते। हम ऐसे ही बनाई जाती हैं और पुरुष भी। यदि हम बचपन से हम लड़कों को बेसिक चीजें सिखा दें साफ-सफ़ाई ,व्यवस्था, कपड़े तह लगाना, बर्तन साफ, सिंक को साफ रखना, तैलिया बिस्तर पर न छोड़ना, या अपनी चीजों को यथास्थान रखना, तो शादीशुदा महिलाओं की कुछ समस्या तो ऐसे ही हल हो जाएगी।

महिला दिवस

  स्वतंत्रता के बाद से आज तक हमारे देश में 1 प्रधानमंत्री, 2 राष्ट्रपति, लगभग 18 मुख्यमंत्री महिला रही हैं। ऐसे बहुत से पद हैं जिनमें हम आज तक प्रथम महिला के नाम को दर्ज करवा रहे हैं। कई क्षेत्र अभी भी जरूर बाकी होंगे जहां पुरुष सत्ता कायम होगी। Ncrb 2022 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,45,256 मामले दर्ज किए गए। यानी जब मैं लिख रही हूं और आप पढ़ रहे हैं तब भी किसी कोने में महिला किसी अपराध का शिकार हो रही है। रोज लगभग 80 महिलाएं बलात्कार झेल रही हैं। न जाने कितनी दहेज, हत्या, छेड़छाड़ को सह रही हैं। जो आंकड़े हैं वो उनके ही हैं जिनके केस रजिस्टर हुए हैं कई हजार तो सिर्फ मान मर्यादा के नाम पर चुप करवा दी जाती हैं। घर में महिलाओं का उनके शरीर, सोच, या किसी विशेष संदर्भ में पिछड़े होने का अक्सर मजाक बनाया ही जाता है। काम के क्षेत्र में आज भी यह माना जाता है कि वह एक सॉफ्ट टारगेट है। कामयाबी पर पहुंची महिला को हम बड़ी सरलता से चरित्र हीन, बिस्तर गर्म करने वाली घोषित कर देते हैं। किसी महिला का खुली सोच का होना, सबके साथ हँसने- हँसाने के व्यवहार को लेकर भी हम उसक...
  लाशों के ढेर पर मिली जीत इंसान को कितना सुकून दे सकती है?

होली

महिलाओं से जबरन होली खेलने की कई वीडियो सामने आ रही हैं। अब आप कह सकते हैं होली के माहौल में बाहर निकली हैं तो ये तो होगा ही। लेकिन आपके समझ में ये नहीं आयेगा कि वो होली खेलने बाहर निकली है या किसी काम से तो भी उनकी इच्छा भी मायने रखती है। होता ये है कि होली के नाम पर कुंठित पुरुषों को महिलाओं के शरीर को छूने का बेहतरीन मौका मिल जाता है। उनके कुंठा के लिए त्यौहार नेक अवसर बन जाता है। जैसे आपको होली खेलने की आजादी है ऐसे उस महिला को भी होली खेलने या न खेलने या अपने पसंद के इंसान के साथ, अपने तरीके से खेलने की आजादी है। कुंठित पुरुष समाज इस बात को नहीं समझ सकता। जबरन किया गया व्यवहार आपको भले ही खुशी दे लेकिन किसी को मानसिक रूप से परेशान कर सकता है।

आंदोलन

  देश के बहुत से लोगों को लगता है कि जेएनयू जैसे संस्थानों के विद्यार्थी कोई पढ़ाई लिखाई नहीं करते उन्हें सिर्फ हंगामा खड़ा करना आता है। पढ़ने से उनका कोई वास्ता नहीं। खुद जेएनयू के ऐसे बहुत से विद्यार्थी हैं जो इस बात के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं कि छात्र आंदोलन के वजह से उनकी पढ़ाई खराब हो रही है। क्लास नहीं हो पा रही है। ये सभी लोग जब देश में बढ़ती महंगाई, हत्या, लुट, बेरोजगारी, रेप, शारीरिक, मानसिक शोषण या ऐसी ही किसी गतिविधि के शिकार होते हैं तो कहते मिलते हैं कोई कुछ करता क्यों नहीं या वक्त और क़िस्मत को कोस कर व्यवस्था के शिकार हो जाते हैं। कोई भी व्यक्ति एक पूरी व्यवस्था बदल सकता है जरूरत है उसके सामने खड़े होने। हम आज चीजों पर चुप हैं क्योंकि हम अपने कंफर्ट जोन में रहना चाहते हैं लेकिन कल जब मुसीबत हम पर आ पड़ती है जब घर की थाली से लेकर पीने का पानी तक महंगा हो जाता तो हम सोचते हैं कि कोई इसके लिए आवाज क्यों नहीं उठाता। कोई चीज अगर ठीक नहीं है तो उसको बदलना एक अच्छे नागरिक का अधिकार और कर्तव्य दोनों है।
Image
 सुकून...