महिला दिवस
स्वतंत्रता के बाद से आज तक हमारे देश में 1 प्रधानमंत्री, 2 राष्ट्रपति, लगभग 18 मुख्यमंत्री महिला रही हैं। ऐसे बहुत से पद हैं जिनमें हम आज तक प्रथम महिला के नाम को दर्ज करवा रहे हैं। कई क्षेत्र अभी भी जरूर बाकी होंगे जहां पुरुष सत्ता कायम होगी। Ncrb 2022 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,45,256 मामले दर्ज किए गए। यानी जब मैं लिख रही हूं और आप पढ़ रहे हैं तब भी किसी कोने में महिला किसी अपराध का शिकार हो रही है। रोज लगभग 80 महिलाएं बलात्कार झेल रही हैं। न जाने कितनी दहेज, हत्या, छेड़छाड़ को सह रही हैं। जो आंकड़े हैं वो उनके ही हैं जिनके केस रजिस्टर हुए हैं कई हजार तो सिर्फ मान मर्यादा के नाम पर चुप करवा दी जाती हैं। घर में महिलाओं का उनके शरीर, सोच, या किसी विशेष संदर्भ में पिछड़े होने का अक्सर मजाक बनाया ही जाता है। काम के क्षेत्र में आज भी यह माना जाता है कि वह एक सॉफ्ट टारगेट है। कामयाबी पर पहुंची महिला को हम बड़ी सरलता से चरित्र हीन, बिस्तर गर्म करने वाली घोषित कर देते हैं। किसी महिला का खुली सोच का होना, सबके साथ हँसने- हँसाने के व्यवहार को लेकर भी हम उसके चरित्र का प्रमाण पत्र बाँटने से नहीं चुकते। साथ बैठी महिला हमें भी अच्छी लगती है पर उसके ऊपर उंगली उठाने में हम सबसे आगे रहते हैं। अपनी साधारण बातचीत में महिलाओं से जुड़ी गालियों का प्रयोग बहुत ही सामान्य बना दिया गया है और ऐसा न करने वालों को भी बेवकूफ मानने में हमें हर्ज नहीं होता। बड़े शहरों की लड़कियों पर चालक और काम निकालने वाली का तमगा हम अक्सर लगा देते हैं। महिलाओं को अक्सर सही निर्णय न लेने वाली माना जाता है। घर में बेटियां होना ही एक मातम का कारण बन जाता है। वंश बढ़ाने के लिए बेटा आज भी जरूरी है। पीरियड्स को लेकर हम आज भी असहज हैं। पैड खरीदते- बेचते समय नजर बचाते हैं अखबार या काली पन्नी का सहारा लेते हैं। महिलाओं के ब्रा स्टेप दिखने से उनके चरित्र का मूल्यांकन कर देते हैं। और जो जितना दिखाएगी उसको छेड़ने, रेप करने का हमारा उतना ही अधिकार है मान लेते हैं। महिलाएं आज भी अपने शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर बात करने में सहज नहीं हो पाती।
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