आंदोलन

 देश के बहुत से लोगों को लगता है कि जेएनयू जैसे संस्थानों के विद्यार्थी कोई पढ़ाई लिखाई नहीं करते उन्हें सिर्फ हंगामा खड़ा करना आता है। पढ़ने से उनका कोई वास्ता नहीं। खुद जेएनयू के ऐसे बहुत से विद्यार्थी हैं जो इस बात के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं कि छात्र आंदोलन के वजह से उनकी पढ़ाई खराब हो रही है। क्लास नहीं हो पा रही है।

ये सभी लोग जब देश में बढ़ती महंगाई, हत्या, लुट, बेरोजगारी, रेप, शारीरिक, मानसिक शोषण या ऐसी ही किसी गतिविधि के शिकार होते हैं तो कहते मिलते हैं कोई कुछ करता क्यों नहीं या वक्त और क़िस्मत को कोस कर व्यवस्था के शिकार हो जाते हैं। कोई भी व्यक्ति एक पूरी व्यवस्था बदल सकता है जरूरत है उसके सामने खड़े होने। हम आज चीजों पर चुप हैं क्योंकि हम अपने कंफर्ट जोन में रहना चाहते हैं लेकिन कल जब मुसीबत हम पर आ पड़ती है जब घर की थाली से लेकर पीने का पानी तक महंगा हो जाता तो हम सोचते हैं कि कोई इसके लिए आवाज क्यों नहीं उठाता। कोई चीज अगर ठीक नहीं है तो उसको बदलना एक अच्छे नागरिक का अधिकार और कर्तव्य दोनों है।

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