कॉमेडी के नाम पर आजकल कुछ भी परोस देना आम बात हो गई है। बहुत कम ऐसे कॉमेडियन हैं जो गालियों के बिना बोल पाते हैं। हर दूसरी लाइन में गाली देना ये लोग (बोलने और सुनने वाले) कूल समझते हैं। अक्सर अपने माँ-बहन, पत्नी की कमजोरियों को हास्य का विषय बनाते हैं। गांव-देहात पर हँसते हैं। मोटी, पतली, सांवली पर मजाक बनाना इनके लिए आम बात है। 370 रुपये की बिरयानी हो या कोई और शो अक्सर ऐसे ही घटिया कंटेंंट, दोहरे अर्थ वाले वाक्यों से भरा होता है। कुछ शो मजाक में ऑन स्टेज लड़कियों को कुछ भी कहकर अपने को महान समझ लेते हैं। और हद्द बात ये है कि जनता इस सब पर हँसती है। परिवार के बड़े बच्चों के साथ इस सब को देखती है और हमें लगता है कि हम मॉडर्न बन रहे हैं।

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